One Week Faculty Development Programme

फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ 06 जुलाई, 2026 को कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के टीचिंग-लर्निंग सेंटर द्वारा इमार्टिकस लर्निंग के संयुक्त तत्वावधान में ‘ट्रांसफॉर्मेटिव टीचिंग पेडागॉजी फॉर जेन जी लर्नर्स’ विषय पर साप्ताहिक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (06 से 11 जुलाई, 2026) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि आज के युवाओं के विकास को देखते हुए शिक्षकों को परिवर्तनकारी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने शिक्षकों से नवीनतम शिक्षण विधियों को अपनाने का आह्वान किया ताकि शिक्षण को अधिक प्रभावी, रुचिपूर्ण और नवाचारयुक्त बनाया जा सके। इमार्टिकस लर्निंग की ओर से डॉ. क्षमा शर्मा, एवीपी अकादमिक हेड ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए इमार्टिकस की भूमिका और कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डाला, तथा पेशेवर प्रभावशीलता और संगठनात्मक विकास को बढ़ावा देने के लिए इसके महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इनसाइट्स (अंतर्दृष्टि) को जोड़ने और शिक्षक एवं विद्यार्थी के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया। इसी क्रम में उन्होंने वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य में शिक्षण को रुचिपूर्ण बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी दिनों में आज के समय में विद्यार्थियों के समक्ष आने वाली विभिन्न समस्याओं और उनके व्यावहारिक समाधान पर विस्तृत रूप से चर्चा की जाएगी। टीचिंग लर्निंग सेंटर की संयोजक, डॉ. रीमा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का परिचय दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. भारती गोधवानी ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के साथ अन्य महाविद्यालयों के कुल 45 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कानोड़िया पीजी महिला  महाविद्यालय  , जयपुर के टीचिंग-लर्निंग सेंटर द्वारा इमार्टिकस लर्निंग के संयुक्त तत्वावधान में ‘ट्रांसफॉर्मेटिव टीचिंग पेडागॉजी फॉर जेन जी लर्नर्स’ विषय पर सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (हाइब्रिड मोड) का दिनांक 13 जुलाई, 2026 को सफलतापूर्वक समापन किया गया। उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि शिक्षकों की परिवर्तनकारी भूमिका में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम सहायक सिद्ध होंगे। शिक्षण को अधिक प्रभावीरुचिपूर्ण और नवाचारयुक्त बनाने के लिये उन्होंने शिक्षकों से नवीनतम शिक्षण विधियों को अपनाने का आह्वान किया। इसी क्रम में इमार्टिकस लर्निंग की मुख्य वक्ता डॉ. क्षमा शर्मा ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डालातथा पेशेवर प्रभावशीलता और संगठनात्मक विकास को बढ़ावा देने के लिए इसके महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का दूसरे दिन ऑनलाइन सत्र डिजिटल युग के छात्रों के व्यवहार को समझने और क्लासरूम के माहौल को बेहतर बनाने पर केंद्रित था। विषय विशेषज्ञ राकेश चौहान ने इस सत्र में अनुभवात्मक शिक्षा और ‘वार्प स्पीड’ जैसे उच्च-प्रभाव वाले एंगेजमेंट एक्टिविटीज को बढ़ावा दिया। तीसरे दिन विषय विशेषज्ञ गणेश दत्ता ने पीयर कोलैबोरेशन के लिए पैडलेटट्रेलोगुडनोट्स और पेगासस जैसे उन्नत डिजिटल टूल्स के उपयोग का प्रदर्शन किया। चौथे दिन डॉ. क्षमा शर्मा ने एनईपी 2020 के तहत आउटकम-बेस्ड एजुकेशन को डिकोड किया और ब्लूम्स टैक्सोनॉमी पर आधारित ‘थिंक-पेयर-शेयर’ और ‘फिशबोउल’ जैसी सक्रिय शिक्षण रणनीतियों की जानकारी दी। पांचवे दिन विषय विशेषज्ञ गणेश दत्ता ने ब्लेंडेड और डिजिटल मॉडल्स के माध्यम से शिक्षण दक्षता बढ़ाने के लिए एलएमएसमूक और कैनवा जैसे विजुअल डिजाइन प्लेटफॉर्म के एकीकरण पर सत्र लिया। कार्यक्रम के छठे दिन सभी प्रतिभागियों के लर्निंग मूल्यांकन हेतु असाइन्मेंट आधारित आंकलन एवं फीडबैक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम के सातवें दिन विषय विशेषज्ञ कृतिका के नेतृत्व में प्रतिभागियों द्वारा अपने विषयों पर डिजिटल मॉड्यूल तैयार किया गयाजिसमें जेन जी के अनुकूल पाठ योजनाएं बनाईं गई। समापन सत्र के अतंर्गत डॉ. भारती गोदवानी द्वारा एफडीपी की समग्र रिपोर्ट का वाचन किया गया। इसी के साथ प्रतिभागी शिक्षकों ने एफडीपी के संबंध में अनुभव एवं फीडबैक साझा किये कार्यक्रम के अंत में प्रमाण-पत्र वितरण सम्पन्न हुआ तथा टीचिंग लर्निंग सेंटर की संयोजकडॉ. रीमा श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के लगभग 61 प्रतिभागियों ने भाग लिया।