NSS E- Waste Management

कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की चारों इकाईयों द्वारा दिनांक 07 अक्टूबर 2026 को ई-वेस्ट के उचित प्रबंधन एवं जागरूकता के उद्देश्य से व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को ई-वेस्ट से होने वाले पर्यावरणीय दुष्प्रभावों, इसके उचित निस्तारण तथा पुनर्चक्रण के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए ई-वेस्ट के संग्रहण एवं उसके पुनर्चक्रण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्लास्टिक कचरे को इधर-उधर न फेंकने तथा पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार नागरिक बनने की सलाह दी। उन्होंने छात्राओं से स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ अपने परिवार एवं समाज में भी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में यशवर्धन शर्मा, अरबन मेटल के संस्थापक एवं अदिति त्यागी ने ई-वेस्ट के विभिन्न प्रकारों एवं इसके उचित प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि अनुपयोगी मोबाइल फोन, चार्जर, केबल, लैपटॉप, कैमरा तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ई-वेस्ट की श्रेणी में आते हैं। इन उपकरणों में उपस्थित विभिन्न हानिकारक पदार्थ पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकते हैं। वक्ताओं ने छात्राओं को सलाह दी कि पुराने अथवा अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कचरे में न डालें और न ही उन्हें कबाड़ी/स्क्रैप डीलर को बेचें। ई-वेस्ट का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए इसे केवल अधिकृत ई-वेस्ट कलेक्टर अथवा अधिकृत रिसाइक्लर को ही सौंपना चाहिए साथ ही छात्राओं से आग्रह किया कि ई-वेस्ट प्रबंधन की जानकारी केवल स्वयं तक सीमित न रखें, बल्कि अपने परिवार, रिश्तेदारों एवं आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करें और बताया कि ई-वेस्ट का जिम्मेदार एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं में ई-वेस्ट के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। इसी उद्देष्य से महाविद्यालय में आज से ई-वेस्ट संग्रहण के लिये दस दिन का संग्रहण अभियान चालू किया गया है। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आँचल पुरी, डॉ. विजयलक्ष्मी गुप्ता, डॉ. हर्षा शर्मा, चारूल शर्मा, डॉ. मंजरी भारद्वाज और डॉ. दीप्ति चौहान के मार्गदर्शन में हुआ।