श्रीलंका के सबरगमुव विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में जयपुर के कानोड़िया महिला महाविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ.शीताभ शर्मा की दो पुस्तकों का विमोचन व व्याख्यान हुआ तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद कोलंबो (ICCR) द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। पर्यटन एवं ऐतिहासिक अकादमी, राजस्थान (थार) तथा अंतरराष्ट्रीय हिन्दी शोध संस्थान बस्ती, उत्तर प्रदेश एवं भाषा विभाग सबरगमुव विश्वविद्यालय श्रीलंका के संयुक्त तत्वावधान में, हिन्दी उपन्यास सम्राट प्रेमचंद तथा श्रीलंका के सिंहली भाषा साहित्यकार मार्टिन विक्रम सिंहली के साहित्य पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें “प्रेमचंद के साहित्य में मूल्य” विषय पर डॉ.शीताभ शर्मा का व्याख्यान आयोजित हुआ। संगोष्ठी में मार्टिन विक्रम सिंहली की 50वीं तथा प्रेमचंद की 146वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में भारत और श्रीलंका के इन दो महान व्यक्तित्वों के समग्र साहित्य पर सार्थक चर्चा हुई। दोनों ने ही अपने समय के यथार्थ को संवेदनात्मक ढंग से व्यक्त किया है। 22 सितंबर को कोलंबो स्थित भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ((ICCR) सभागार में भारत श्रीलंका संबंधों पर काव्य गोष्ठी आयोजित की गयी इसमें भारतीय विद्वानों को पारंपरिक शैली में सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि प्रो.लक्ष्मण सेनेविरत्न (पूर्व उप कुलपति केलानिया यूनिवर्सिटी श्रीलंका) बीज वक्ता प्रो.जयंत कर शर्मा, (पूर्व कुलपति उड़ीसा मुक्त विश्वविद्यालय), विशिष्ट अतिथि प्रो. रोहन अभय विक्रम, अधिष्ठाता मानविकी, सबरगमुव विश्वविद्यालय, प्रो. सुधीर सोनी ने अध्यक्षता की। आयोजकों में सबरगमुव विश्वद्यालय भाषा विभाग के अध्यक्ष डॉ. ब्रासिल नागोड़ा बिथाना, संयोजक प्रो. संगीत रत्नायके, सह संयोजक प्रो. मुकेश मिश्र रहे। संपूर्ण भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों से हिन्दी साहित्य के कुल 24विद्वान संगोष्ठी में सम्मिलित हुए। श्रीलंका के कई विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा, विषय के रूप में प्रारंभिक से स्नातक से पी. एचडी. तक की सभी शिक्षा सुचारू हैं। भाषा के साथ हिंदी साहित्य भी विषय रूप में पढ़ाया जा रहा है। यहां के विश्वविद्यालयों में श्रीलंका की सिंहली भाषा और हिन्दी की रचनाओं का परस्पर अनुवाद कार्य वर्षों से चल रहा है। श्रीलंका में हिन्दी भाषा को विषय रूप में आरंभ व स्थापित करने का श्रेय प्रो. इंद्रा दसनायके को है जिन्होंने भारत के लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. प्रभा शंकर शुक्ल के निर्देशन में पी एचडी. शिक्षा प्राप्त की थी।
महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने हिन्दी भाषा और साहित्य के वैश्विक संवर्धन पर हर्ष जताते हुए महाविद्यालय के शिक्षक के अंतर राष्ट्रीय बौद्धिक सहभागिता को पठन पाठन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए हर्ष व्यक्त किया।
महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने हिन्दी भाषा और साहित्य के वैश्विक संवर्धन पर हर्ष जताते हुए महाविद्यालय के शिक्षक के अंतर राष्ट्रीय बौद्धिक सहभागिता को पठन पाठन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए हर्ष व्यक्त किया।