कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के लोक प्रशासन एवं कम्प्यूटर विज्ञान विभाग द्वारा इनर व्हील क्लब, जयपुर ईस्ट के सहयोग से दिनांक 22 सितंबर 2026 से 26 सितंबर 2026 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य प्रौद्योगिकी और आधुनिक शिक्षा के बीच की दूरी को कम करना था। प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को महत्वपूर्ण डिजिटल बारीकियों को समझाया गया, ताकि वे एआई उपकरणों को अपने शैक्षणिक एवं व्यावहारिक कार्यों में प्रभावी रूप से उपयोग कर सकें। प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन सत्र दिनांक  26 सितंबर 2026 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ़ सीमा अग्रवाल ने इनर व्हील के पदाधिकारियों का स्वागत किया तथा अपने उद्बोधन में छात्राओं को बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप स्वयं को तैयार करने और एआई जैसी उभरती तकनीकों को अपने शैक्षणिक एवं भविष्य के व्यावसायिक जीवन में उपयोग करने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। इनर व्हील क्लब की अध्यक्ष ममता जैन ने भी छात्राओं से प्रेरणादायक संवाद किया। उप-प्राचार्य डॉ. मनीषा माथुर ने अपने उद्बोधन में छात्राओं को निरंतर नयी तकनीक एवं कौशल सीखने के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में एआई के विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों (AI Ecosystems) का परिचय दिया गया। साथ ही, प्रशिक्षक सुश्री प्रज्ञा गौर द्वारा प्रतिभागियों को  ChatGPT, Google Gemini, Lovable और Canva AI जैसे आधुनिक एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया तथा प्रतिभागियों को एआई के जिम्मेदार, सुरक्षित और नैतिक उपयोग के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। इस अवसर पर विभिन्न संकाय एवं विषय से संबंधित कुल 51 छात्राओं को प्रशिक्षण में सफलतापूर्वक सहभागिता के लिए प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ जयन्ती गोयल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में मंच संचालन दीपा चौहान ने किया। संकाय सदस्य डॉ. शिल्पा पारीक, डॉ. आशु सिन्हा, निधि महर्षि एवं हर्षिता वर्मा उपस्थित रहीं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्राओं को आधुनिक एआई तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें अपने शैक्षणिक, शोध एवं व्यावसायिक कार्यों में एआई के प्रभावी, सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आयाम सिद्ध हुआ।