कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के आंतरिक गुणवत्ता मूल्यांकन प्रकोष्ठ एवं राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नारकोटिक्स अकादमी (एनएसीआईएन), के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 20 जनवरी 2026 को छात्राओं के लिए मादक पदार्थ जागरूकता विषय पर एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत वक्तव्य में स्वजागृति को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दूसरों की सहायता हम तभी कर सकते हैं जब हम स्वयं मादक पदार्थों के खतरों के प्रति जागरूक हो। सत्र में प्रशिक्षक के रूप में नरेश बुंदेल, उपायुक्त, सी. बी. एन, तथा ललित पालीवाल, सहायक निदेशक, (एनएसीआईएन),उपस्थित थे। नरेश बुंदेल ने कहा कि युवा वर्ग के लिए मादक पदार्थों की लत लगना बहुत आसान होता है। इसके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे साथियों का दबाव, तनाव, प्रतियोगिता, जिज्ञासा तथा भावनात्मक पीड़ा आदि। उन्होंने यह भी बताया कि ड्रग्स की लत मानव मस्तिष्क के प्रतिक्रिया और विचार के अंतराल में पड़ जाती है। उन्होंने लघु वीडियो फिल्म के द्वारा बताया कि ड्रग्स की लत के पांच पड़ाव होते हैं- जिज्ञासा, आनंद, सहनशीलता, निर्भरता और विनाश। नरेश बुंदेल ने ड्रग्स की रोकथाम को एकमात्र उपाय बताते हुए, सही साथ, तनाव प्रबंधन के स्वास्थ्य तरीकों को अपनाना, दबाव और सोशल मीडिया के प्रभाव से दूर रहना और ड्रग्स को दृढ़ता से न कहने पर बल दिया। उन्होंने प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक ड्रग्स में भेद बताते हुए कहा कि दोनों प्रकार के मादक पदार्थ हानिकारक होते हैं, किन्तु कुछ प्राकृतिक ड्रग्स का औषधीय प्रयोग भी होता है। उन्होंने एन डी पी टी एस एक्ट, 1985 के विषय में भी बताया। सत्र के अंत सभी को मादक पदार्थों से दूर रहने के लिए शपथ दिलाई गई।
सत्र में आंतरिक गुणवत्ता मूल्यांकन प्रकोष्ठ संयोजक, डॉ. सारिका कौल समेत कुल 39 शिक्षिकाओं सहित, 124 छात्राओं ने भाग लिया।