कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के टीचिंग-लर्निंग सेंटर द्वारा अशैक्षणिक कर्मचारियों के लिए दिनांक 24 जून 2026 से सात दिवसीय (24 जून से 30 जून, 2026) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। ‘‘आत्मविश्वास और कार्यकुशलता“ विषय पर आधारित विशेष प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल के उद्बोधन से हुआ। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय के अशैक्षणिक कर्मचारियों को डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग व कार्यस्थल पर पारस्परिक संचार कौशल के लिये प्रशिक्षित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण दो समूहों में दिया जा रहा है, जिससे वे अपने कार्यक्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का दक्षतापूर्वक उपयोग कर सकेंगे।
कार्यक्रम के पहले दिन कंप्यूटर विभाग की प्रध्यापिका दीपा चौहान ने समूह एक को एआई के उपयोग से समय बचाते हुये कार्यकुशलता बढ़ाने के प्रयोग बताये। समूह दो को साइबर स्मार्ट बनने के लिये अपने डेटा को सुरक्षित रखने व डिजिटल धोखाधड़ी से बचने के लिये विभिन्न प्लेटफार्म की जानकारी दी। इस आयोजन में कुल 35 अशैक्षणिक कर्मचारी उत्साहपूर्वक भाग लेकर नई तकनीकों के बारे में सीखा।
सात दिवसीय कार्यशाला-आत्मविश्वास और कार्यकुशलता का हुआ समापन
कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के टीचिंग-लर्निंग सेंटर द्वारा अशैक्षणिक कर्मचारियों के लिए दिनांक 24 जून 2026 से सात दिवसीय (24 जून से 30 जून, 2026) ‘‘आत्मविश्वास और कार्यकुशलता“ विषय पर आधारित विशेष प्रशिक्षण शिविर का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों के प्रशासनिक, तकनीकी, संचार एवं व्यावसायिक कौशल का विकास करना, उनमें आत्मविश्वास का निर्माण करना तथा कार्यस्थल पर उनकी दक्षता एवं कार्यकुशलता को बढ़ाना था।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रशासनिक उपकरणों के उपयोग, साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल फ्रॉड से बचाव, प्रभावी संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास, अंग्रेजी भाषा कौशल, व्यक्तिगत स्वच्छता एवं प्रोफेशनल ग्रूमिंग, कार्यस्थल की नैतिकता तथा क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक एवं संवादात्मक सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया। इस अवसर पर दीपा चैहान, डॉ. प्रीति शर्मा, ऋषिता शर्मा, डॉ. रीमा श्रीवास्तव, डॉ. मोहिता चतुर्वेदी शर्मा, डॉ. टीना सिंह, डॉ. रचना गोस्वामी एवं डॉ. ऋचा चतुर्वेदी ने विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव एवं विशेषज्ञता साझा करते हुए प्रतिभागियों को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न असाइनमेंट्स एवं अभ्यास गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर भी दिया गया। कार्यशाला के समापन अवसर पर वक्ताओं ने प्रतिभागियों से प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को अपने दैनिक कार्यों में अपनाने का आह्वान किया। प्रतिभागियों ने सभी सत्रो में सक्रिय सहभागिता करते हुए कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया। यह प्रशिक्षण कार्यशाला प्रतिभागियों के आत्मविश्वास, कार्यस्थल की नैतिकता, संचार दक्षता, तकनीकी समझ तथा व्यावसायिक क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई, जो संस्थान की कार्यसंस्कृति एवं सेवा गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी।
महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने कर्मचारियों को संबोधित कर इस प्रकार के प्रशिक्षण में भाग लेने के लिये प्रोत्साहित किया तथा आगे भी इस तरह की गतिविधियों के आयोजन करने का आश्वासन दिया। महाविद्यालय निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी द्वारा कर्मचारियों का उत्साहवर्द्धन किया गया और समापन सत्र में कर्मचारियों को प्रमाण-पत्र दिए गए। कार्यशाला में 50 अशैक्षणिक कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।