“औषधि के रूप में पौधेः आयुर्वेद के पीछे का वनस्पति विज्ञान” विषय पर व्याख्यान का आयोजन

“औषधि के रूप में पौधेः आयुर्वेद के पीछे का वनस्पति विज्ञान” विषय पर व्याख्यान का आयोजन
कानोड़िया पी. जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के वनस्पति विज्ञान विभाग एवं भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को “औषधि के रूप में पौधेः आयुर्वेद के पीछे का वनस्पति विज्ञान” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को औषधीय पौधों के महत्व, आयुर्वेद में उनकी भूमिका तथा पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक वनस्पति विज्ञान के बीच संबंधों से परिचित कराना रहा। व्याख्यान में डॉ. निशा शर्मा, आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, राजकीय आयुर्वेद औषधालय, जयपुर, ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्राओं से अपने विचार साझा किये। डॉ निशा शर्मा ने पेठा, अरंडी, प्याज़, तिल, जाती, मोगरा, मेंहदी, वसाका, मुलेठी, धनिया, आमला, बेल, हल्दी, मिर्च, तुलसी, लॉन्ग आदि के औषधीय गुणों, उनके पारंपरिक उपयोगों तथा स्वस्थ्य जीवनशैली में उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। साथ ही, पौधों में पाए जाने वाले जैव-सक्रिय घटकों और उनके आयुर्वेदिक औषधीय महत्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया। डॉ. शर्मा ने कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित आयुर्वेदिक ज्ञान की समृद्ध विरासत से अवगत कराने के साथ-साथ औषधीय पौधों के संरक्षण, सतत उपयोग तथा जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में वनस्पति विज्ञान विभाग की समस्त प्राध्यापिकाएं एवं 75 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया एवं अपना ज्ञानवर्धन किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं में पादपों के औषधीय महत्व, रोगनाशक क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई।