कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर, और राजस्थान वन एवं वन्यजीव प्रशिक्षण संस्थान (आरएफडब्लूटीआई), राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में “सस्टैनबल डेवलपमेंट गोल्स : ए कलेक्टिव रिस्पांसिबिलिटी’’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का दिनांक 25 मार्च 2025 को सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजीएस) को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर चर्चा को बढ़ावा देना था।
महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल के स्वागत भाषण के साथ संगोष्ठी का आरम्भ हुआ। प्राचार्य ने 17 सतत विकास लक्ष्यों के बारे में बात करते हुये कहा कि इन्हें प्राप्त करने के लिये सभी की सहभागिता की आवश्यकता है। संगोष्ठी सचिव डॉ. रितु जैन द्वारा संगोष्ठी का परिचय दिया गया। संगोष्ठी की मुख्य अतिथि सुश्री शैलजा देवल, निदेशक, (आरएफडब्लूटीआई) राजस्थान सरकार रहीं। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुये जिम्मेदार नागरिक बनने के लिये प्रोत्साहित करते हुये सतत विकास लक्ष्यों का अभिन्न अंग बनने की प्रेरणा दी। महाविद्यालय निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने विशेष टिप्पणी करते हुये कहा सतत विकास के लिये आवश्यक है कि मानव मन के लालच पर नियंत्रण रखें। संगोष्ठी की संयोजक एवं उप-प्राचार्य डॉ. रंजना अग्रवाल ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। संगोष्ठी में दो तकनीकी सत्र व एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता प्रो. नीलिमा गुप्ता एवं हेमंत पारीक ने की। सत्र में लगभग 20 छात्र-छात्राओं ने सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े शोध पत्र और केस स्टडीज प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में पैनल चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनमें अधिवक्ता जितेंद्र श्रीमाली (पार्षद, नगर निगम) डॉ. सीमा अग्रवाल, श्री मुकेश गुप्ता, प्रो. निवेदिता कौल, सुश्री ऋचा सिंघी और सुश्री निमिषा जैन ने चर्चा में भाग लिया। चर्चा में नीतिगत ढांचे, सर्कुलर इकॉनमी, अरबन फार्मिंग, सामुदायिक भागीदारी और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के व्यावहारिक दृष्टिकोणों पर विचार किया गया। कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. नीरज के. पवन (आईएएस), सचिव, युवा मामले एवं खेल विभाग ने सरकार द्वारा बनाई गई सतत विकास की नीतियों के बारे बताया तथा प्रतिभागियों को प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने की शपथ दिलायी। डॉ. रितु जैन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
संगोष्ठी में लगभग 150 प्रतिभागियों द्वारा पंजीकरण कराया गया। सतत विकास और सामूहिक उत्तरदायित्व को प्रोत्साहित करने हेतु यह संगोष्ठी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।