‘सात दिवसीय फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ’

’सात दिवसीय फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ’ 07 जनवरी, 2026 को कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर के टीचिंग-लर्निंग सेंटर द्वारा इमार्टिकस लर्निग के संयुक्त तत्वावधान में ’जेन जेड लर्नर एंड एनोवेटिव टीचिंग मेथाडोलॉजी’ विषय पर सात दिवसीय फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम (07 से 13 जनवरी, 2026) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को जेन जेड लर्नर्स की सीखने की शैली को समझने एवं शिक्षण को अधिक प्रभावी, रुचिकर और नवाचारयुक्त बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने शिक्षकों से नवीनतम शिक्षण विधियों को अपनाने का आह्वान किया। इमार्टिकस लर्निंग की ओर से अभिषेक कुमार, नेशनल हेड, सीओई ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए शिक्षा में तकनीक के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला तथा शिक्षकों को परिवर्तनकारी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। इसी क्रम में कौशल सिंह, असिस्टेंट वाइस प्रसिडेंट ट्रेनिंग, इमार्टिकस लर्निंग ने वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य में शिक्षक एवं विद्यार्थी के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने तथा शिक्षण को रुचिकर बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। प्रथम सत्र की शुरूआत गणेश दत्ता वाइस प्रसिडेंट, ट्रेनिंग, इमार्टिकस लर्निंग ने शिक्षकों के साथ संवाद करते हुए आज के समय में विद्यार्थियों के समक्ष आने वाली विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की तथा उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि आगामी छह दिनों में इन सभी विषयों पर विस्तृत रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन टीचिंग लर्निंग सेंटर की संयोजक डॉ. रीमा श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय से 40 व अन्य संस्थानों से 04 शिक्षिकाएँ उपस्थित रहीं।

’सात दिवसीय फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम का आज हुआ समापन'

’सात दिवसीय फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम का आज हुआ समापन’
 
कानोडिया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के टीचिंग लर्निंग सेंटर द्वारा इमार्टिकस लर्निंग के संयुक्त तत्वाधान में ‘‘जेन जेड लर्नर एण्ड इनोवेटिव टीचिंग मेथेडोलॉजी’’ विषय पर सात दिवसीय फैकल्टी डेवेलपमेंट प्रोग्राम (7 से 13 जनवरी) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रथम दिन महाविद्यालय प्राचार्य डॉ सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की जेन जेड लर्नर की सीखने की शैली को समझने एवं शिक्षण प्रणाली को नवाचार युक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगें। इमार्टिकस लर्निंग की ओर से मुख्य वक्ता श्री गणेश दत्ता लक्कुर एवं श्री कौशल सिंह ने छात्राओं की सहभागिता कक्षा में बढाने के लिए विभिन्न गतिविधियों जैसे- गूगल क्लासरूम लर्निंग, पर्सनलाइज्ड लर्निंग एवं पियर लर्निंग पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दूसरे दिन श्री गणेश दत्ता लक्कुर एवं श्री कौशल सिंह ने जेन जेड लर्नर की मानसिकता और अपेक्षाओं को समझने के लिए शॉर्ट विडियो, यूटयूब विडियोज एवं रियल वर्ल्ड सिनेरियो को कक्षा में सम्मिलित करने पर चर्चा की। कार्यक्रम के तीसरे दिन डॉ. साक्षी जैन, मैनेजर, ट्रेनिंग एन. आई. ने शिक्षण को अधिक इंटरैक्टिव एवं छात्र केन्द्रित बनाने के लिए फ्लिप्ड क्लासरूम, माइक्रो लर्निंग टूल जैसे नोटबुक एल.एम., एडोब स्पार्क, मैजिक मीडिया आदि तकनीकी की विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के चौथे दिन डॉ. क्षमा शर्मा, ए. वी. पी., एकेडमिक हेड ने आउटकम बेस्ट लर्निंग (ओ.बी.ई.), ओ.बी.ई. मैपिंग, स्वंयम, शॉर्ट केसैज, ब्लूम टेक्सोनोमी एवं ब्रेनस्टॉर्मिंग जैसी गतिविधियों की शिक्षण प्रणाली में सम्मिलित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के पाँचवे दिन सभी प्रतिभागियों के अधिगम मूल्यांकन हेतु असाइन्मेंट आधारित आंकलन एवं फीडबैक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम के छठे और सातवें दिन वक्ता श्री गणेश दत्ता लक्कुर एवं श्री कौशल सिंह ने ब्लेंडेड लर्निंग, विभन्न असेसमेंट टूल जैसे पैडलेट, क्विज़ेज, यूट्यूब विडियोज, चैट जीपीटी, वेयग्राउंड क्विज़ एवं कैनवा द्वारा क्लास रूम को रुचिकर बनाने के तरीकों पर चर्चा की एवं सभी प्रतिभागियों को लिंकडिन प्रोफाइल के द्वारा शिक्षा में सोशल नेटवर्किंग की भूमिका को बताया। वेलेडिक्ट्री सत्र में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ सीमा अग्रवाल ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम कक्षा शिक्षण को प्रभावी बनाने और शिक्षण रणनीतियों में परिवर्तन करने हेतु लगातार आयोजित किये जाने चाहिए, जिससे उच्च शिक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सके। श्री गणेश दत्ता लक्कुर ने एफ.डी.पी. पर अपने विचार साझा करते हुए शिक्षकों के सतत विकास, नवाचारपूर्ण शिक्षण रणनीतियों एवं सह-अधिगम के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. दीपा चौहान ने एफ.डी.पी. की समग्र रिपोर्ट का वाचन किया। इसके पश्चात प्रतिभागी शिक्षकों ने एफ.डी.पी. के संबंध में अपने अनुभव एवं फीडबैक साझा किए। कार्यक्रम के अंत में प्रमाण-पत्र वितरण संपन्न हुआ तथा डॉ. रीमा श्रीवास्तव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय समेत अन्य शिक्षण संस्थानें के लगभग 45 प्रतिभागियों ने भाग लिया।